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नीति और शासन
6 मिनट में पढ़ें प्रकाशित: 20 जनवरी 2025अपडेट: 10 अक्टूबर 2026

केंद्रीय क्षेत्र योजना और केंद्र प्रायोजित योजना में क्या फ़र्क़ है: हर नागरिक को यह जानना चाहिए

भारत में योजनाओं के प्रकार आसान भाषा में: पैसा केंद्र और राज्य के बीच कैसे बँटता है, नियम कौन बनाता है और फ़ायदे के लिए आवेदन कहाँ करना है।

लेखक: सरकारी योजना संपादकीय टीमजाँचा हुआ जानकारी वाला लेख
केंद्रीय क्षेत्र योजना और केंद्र प्रायोजित योजना में क्या फ़र्क़ है: हर नागरिक को यह जानना चाहिए — सरकारी योजना

भारत में सरकारी योजनाओं के बारे में पढ़ते हुए अक्सर 'केंद्रीय क्षेत्र योजना' (Central Sector Scheme), 'केंद्र प्रायोजित योजना' (Centrally Sponsored Scheme - CSS) और 'राज्य क्षेत्र योजना' (State Sector Scheme) जैसे शब्द आते हैं। इन्हें समझने से आवेदक को पता चलता है कि पात्रता के नियम कौन तय करता है, दस्तावेज़ कौन-सा विभाग जाँचता है और पैसा कौन भेजता है।

केंद्रीय क्षेत्र योजनाएँ (पूरा पैसा केंद्र सरकार का)

इन योजनाओं का 100% ख़र्च भारत सरकार अपने मंत्रालयों के ज़रिए सीधे उठाती है और ख़ुद ही लागू करती है:

  • उदाहरण: पीएम-किसान, पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना, केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी (CSIS), पीएम विश्वकर्मा।
  • कैसे चलती हैं: सीधे केंद्र के दिशानिर्देशों से। पैसा केंद्र सरकार के ख़ज़ाने से PFMS के ज़रिए सीधे नागरिक के बैंक खाते में जाता है।
  • पोर्टल: आम तौर पर केंद्र सरकार के डोमेन पर, जैसे pmkisan.gov.in, pmsuryaghar.gov.in।

केंद्र प्रायोजित योजनाएँ (CSS - ख़र्च में साझेदारी)

ये योजनाएँ केंद्र सरकार बनाती है, लेकिन लागू राज्य सरकारें करती हैं:

  • पैसे का बँटवारा: आम राज्यों में आम तौर पर 60:40 (केंद्र:राज्य), पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90:10, और बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में 100% केंद्र का।
  • उदाहरण: आयुष्मान भारत PM-JAY, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), समग्र शिक्षा अभियान, PMGSY।
  • कैसे चलती हैं: केंद्र मोटी-मोटी नीति तय करता है, जबकि राज्य सरकारें पात्र लाभार्थियों की पहचान करती हैं, कार्ड बनाती हैं और स्थानीय शिकायतें सुलझाती हैं।

राज्य क्षेत्र योजनाएँ (पूरा पैसा राज्य सरकार का)

ये योजनाएँ पूरी तरह राज्य सरकार बनाती है और अपनी टैक्स कमाई से चलाती है:

  • उदाहरण: मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (मध्य प्रदेश), गृह लक्ष्मी (कर्नाटक), कलैग्नर मगलिर उरिमई तिट्टम (तमिलनाडु), कन्याश्री प्रकल्प (पश्चिम बंगाल), रायथु भरोसा (तेलंगाना, जिसने 2025 में रायथु बंधु की जगह ली)।
  • कैसे चलती हैं: राज्य मंत्रिमंडल इन्हें बनाता है; नागरिकों की पात्रता और शर्तें सिर्फ़ राज्य के क़ानून और ज़िला प्रशासन तय करते हैं।